श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.60.14 
अयं कौन्तेय कामस्ते नचिरात् समुपस्थित:।
योत्स्यसे हि मया सार्धमद्य द्रक्ष्यसि मे बलम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार! मेरे साथ युद्ध करने का तुम्हारा साहस अभी प्रकट हुआ है। अतः अब तुम मेरे साथ युद्ध करोगे और आज तुम स्वयं मेरा बल देखोगे।॥14॥
 
Kuntikumar! Your courage to fight with me has just manifested. So now you will fight with me and today you will see my strength yourself.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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