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श्लोक 4.60.10  |
यत् त्वया मर्षितं पूर्वं तदशक्तेन मर्षितम्।
इतो गृह्णीमहे पार्थ तव दृष्ट्वा पराक्रमम्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| पार्थ! तुम्हारे वाक्-कौशल को देखकर हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि तुमने पूर्वकाल में जो कुछ भी सहा है, वह सब अपनी असमर्थता के कारण ही किया है॥ 10॥ |
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| Parth! Seeing your verbal prowess we can conclude that whatever you have endured in the past, you have done so only because of your inability.॥ 10॥ |
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