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श्लोक 4.60.1  |
अर्जुन उवाच
कर्ण यत् ते सभामध्ये बहु वाचा विकत्थितम्।
न मे युधि समोऽस्तीति तदिदं समुपस्थितम्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| अर्जुन बोले - कर्ण ! पहले कौरव सभा में तुमने यह कहकर अपनी बड़ी प्रशंसा की थी कि युद्ध में मेरे समान दूसरा कोई योद्धा नहीं है। (उसी की सत्यता की परीक्षा करने के लिए) युद्ध का यह अवसर आया है।॥1॥ |
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| Arjun said - Karna! Earlier in the Kaurava assembly you had praised yourself a lot by saying that there is no other warrior like me in the war. (To test the truth of that) this opportunity of war has come.॥ 1॥ |
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