Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.6.5: हे पृथ्वी का भार हरने वाली पवित्र देवी! आप सदैव सबका कल्याण करती रहती हैं। जो आपका स्मरण करते हैं, उन्हें आप पाप और उससे उत्पन्न होने वाले कष्टों से वैसे ही बचाती हैं, जैसे कोई मनुष्य कीचड़ में फँसी हुई दुर्बल गाय को बचा लेता है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 4.6: युधिष्ठिरद्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति और देवीका प्रत्यक्ष प्रकट होकर उन्हें वर देना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 6: युधिष्ठिरद्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति और देवीका प्रत्यक्ष प्रकट होकर उन्हें वर देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.6.5 
भारावतरणे पुण्ये ये स्मरन्ति सदाशिवाम्।
तान् वै तारयसे पापात् पङ्के गामिव दुर्बलाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी का भार हरने वाली पवित्र देवी! आप सदैव सबका कल्याण करती रहती हैं। जो आपका स्मरण करते हैं, उन्हें आप पाप और उससे उत्पन्न होने वाले कष्टों से वैसे ही बचाती हैं, जैसे कोई मनुष्य कीचड़ में फँसी हुई दुर्बल गाय को बचा लेता है।॥5॥
 
‘O pious goddess who relieves the burden of the earth! You are always doing good to everyone. You rescue those who remember you from sin and the sufferings that result from it; just like a man rescues a weak cow stuck in the mud.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)