| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 6: युधिष्ठिरद्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति और देवीका प्रत्यक्ष प्रकट होकर उन्हें वर देना » श्लोक 30-35 |
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| | | | श्लोक 4.6.30-35  | मत्प्रसादाच्च ते सौख्यमारोग्यं च भविष्यति।
ये च संकीर्तयिष्यन्ति लोके विगतकल्मषा:॥ ३०॥
तेषां तुष्टा प्रदास्यामि राज्यमायुर्वपु: सुतम्।
प्रवासे नगरे चापि संग्रामे शत्रुसंकटे॥ ३१॥
अटव्यां दुर्गकान्तारे सागरे गहने गिरौ।
ये स्मरिष्यन्ति मां राजन् यथाहं भवता स्मृता॥ ३२॥
न तेषां दुर्लभं किंचिदस्मिँल्लोके भविष्यति।
इदं स्तोत्रवरं भक्त्या शृणुयाद् वा पठेत वा॥ ३३॥
तस्य सर्वाणि कार्याणि सिद्धिं यास्यन्ति पाण्डवा:।
मत्प्रसादाच्च व: सर्वान् विराटनगरे स्थितान्॥ ३४॥
न प्रज्ञास्यन्ति कुरवो नरा वा तन्निवासिन:।
इत्युक्त्वा वरदा देवी युधिष्ठिरमरिंदमम्।
रक्षां कृत्वा च पाण्डूनां तत्रैवान्तरधीयत॥ ३५॥ | | | | | | अनुवाद | | मेरी कृपा से तुम्हें सुख और आरोग्य की प्राप्ति होगी। संसार में जो लोग मेरा गुणगान और स्तुति करेंगे, वे पापों से मुक्त हो जायेंगे और मैं प्रसन्न होकर उन्हें राज्य, दीर्घायु, स्वस्थ शरीर और पुत्र प्रदान करुँगा। राजन! जिस प्रकार तुमने मेरा स्मरण किया है, उसी प्रकार जो लोग परदेश में, नगर में, युद्ध में, शत्रुओं से सामना होने पर, घने वनों में, दुर्गम मार्गों पर, समुद्र में तथा गहन पर्वतों पर रहते हुए मेरा स्मरण करेंगे, उनके लिए इस संसार में कोई भी कार्य कठिन नहीं होगा। पाण्डवों! जो कोई भक्तिपूर्वक इस उत्तम स्तोत्र को सुनेगा या पढ़ेगा, उसके सभी कार्य सिद्ध होंगे। मेरी कृपा से विराटनगर में रहते हुए तुम सभी को कौरव या उस नगर में रहने वाले लोग नहीं पहचान सकेंगे। शत्रुओं का दमन कर रहे राजा युधिष्ठिर से ऐसा कहकर वरदायिनी देवी दुर्गा ने पाण्डवों की रक्षा का भार अपने ऊपर ले लिया और वहीं अन्तर्धान हो गयीं। | | | | By my grace you will get happiness and health. The people in the world who will sing my praises and praise me will be free from sins and I will be pleased and give them a kingdom, long life, healthy body and a son. King! Just as you have remembered me, similarly those who remember me while living abroad, in the city, in war, when faced by enemies, in dense forests, on difficult paths, in the sea and on deep mountains, nothing will be difficult for them in this world. Pandavas! Whoever listens to or reads this Uttama Stotra with devotion, all his tasks will be accomplished. By my grace, while living in Viratnagar, you all will not be recognized by the Kauravas or the people living in that city. Having said this to King Yudhishthir, who was suppressing the enemies, Goddess Durga, the giver of boons, took the responsibility of protecting the Pandavas and disappeared there. | | | इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि पाण्डवप्रवेशपर्वणि दुर्गास्तवे षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत पाण्डवप्रवेशपर्वमें दुर्गास्तोत्रविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ॥ ६॥
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