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श्लोक 4.6.27-29  |
देव्युवाच
शृणु राजन् महाबाहो मदीयं वचनं प्रभो॥ २७॥
भविष्यत्यचिरादेव संग्रामे विजयस्तव।
मम प्रसादान्निर्जित्य हत्वा कौरववाहिनीम्॥ २८॥
राज्यं निष्कण्टकं कृत्वा भोक्ष्यसे मेदिनीं पुन:।
भ्रातृभि: सहितो राजन् प्रीतिं प्राप्स्यसि पुष्कलाम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| देवी बोलीं - महाबाहु राजा युधिष्ठिर ! मेरी बात सुनो । समर्थ नरेश ! तुम्हें शीघ्र ही युद्ध में विजय प्राप्त होगी । मेरे आशीर्वाद से कौरव सेना को परास्त करके तुम निर्विघ्न राज्य करोगे और पुनः इस पृथ्वी का सुख भोगोगे । राजन ! तुम्हें अपने भाइयों सहित पूर्ण सुख प्राप्त होगा । 27-29॥ |
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| The goddess said – Mighty-armed King Yudhishthir! Listen to me. Able King! Soon you will get victory in the battle. By defeating the Kaurava army with my blessings, you will rule without any problems and will again enjoy the happiness of this earth. Rajan! You will get complete happiness along with your brothers. 27-29॥ |
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