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mahabharat 4.59.6: तत्पश्चात् पराक्रमी अश्वत्थामा ने युद्धभूमि में विचरण करते हुए अर्जुन के धनुष की डोरी में एक छोटा-सा छेद (थोड़ी-सी असावधानी) देखकर क्षुर नामक बाण से उसे काट डाला। उसके इस अलौकिक कार्य को देखकर समस्त देवता उसकी बहुत प्रशंसा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 4.59: अश्वत्थामाके साथ अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 59: अश्वत्थामाके साथ अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.59.6 
ततो द्रौणिर्महावीर्य: पार्थस्य विचरिष्यत:।
विवरं सूक्ष्ममालोक्य ज्यां चिच्छेद क्षुरेण ह।
तदस्यापूजयन् देवा: कर्म दृष्ट्वातिमानुषम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी अश्वत्थामा ने युद्धभूमि में विचरण करते हुए अर्जुन के धनुष की डोरी में एक छोटा-सा छेद (थोड़ी-सी असावधानी) देखकर क्षुर नामक बाण से उसे काट डाला। उसके इस अलौकिक कार्य को देखकर समस्त देवता उसकी बहुत प्रशंसा करने लगे।
 
Thereafter the mighty Ashvatthama, while roaming on the battlefield, seeing a small hole (a little carelessness) in Arjuna's bowstring, cut it with an arrow called Kshur. Seeing this superhuman act of his, all the gods started praising him a lot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)