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श्लोक 4.59.16  |
तत: कर्णो महाचापं विकृष्याभ्यधिकं तदा।
अवाक्षिपत् तत: शब्दो हाहाकारो महानभूत्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| तब कर्ण ने बड़े जोर से अपना महान धनुष खींचा और उसे घुमाया, जिससे बड़ा कोलाहल मच गया॥16॥ |
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| Then Karna pulled his great bow with great force and twirled it. This created a great uproar.॥ 16॥ |
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