श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 69-70
 
 
श्लोक  4.58.69-70 
तत: शतसहस्राणि शराणां नतपर्वणाम्।
युगपत् प्रापतंस्तत्र द्रोणस्य रथमन्तिकात्॥ ६९॥
कीर्यमाणे तदा द्रोणे शरैर्गाण्डीवधन्वना।
हाहाकारो महानासीत् सैन्यानां भरतर्षभ॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् एक लाख मुड़े हुए बाण द्रोणाचार्य के रथ के पास गिर पड़े। जनमेजय! जब गाण्डीवधारी अर्जुन ने इस प्रकार द्रोणाचार्य पर बाणों की वर्षा आरम्भ की, तब कौरव सैनिकों में महान् कोलाहल मच गया।
 
Thereafter one lakh arrows with bent ends fell near Dronacharya's chariot. Janamejaya! When Gandiva-wielding Arjuna started showering arrows on Drona in this manner, there was great uproar among the Kaurava soldiers. 69-70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)