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mahabharat 4.58.6-7: वे बुद्धि में शुक्राचार्य के समान तथा नीति में बृहस्पति के समान हैं। *मरिष! चारों वेद, ब्रह्मचर्य, संहार विधि सहित समस्त दिव्यास्त्र तथा सम्पूर्ण धनुर्वेद उनमें सदैव प्रतिष्ठित रहते हैं। 6-7।   |   mahabharat अध्याय 4.58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  4.58.6-7 
बुद्धॺा तुल्यो ह्युशनसा बृहस्पतिसमो नये।
वेदास्तथैव चत्वारो ब्रह्मचर्यं तथैव च॥ ६॥
ससंहाराणि सर्वाणि दिव्यान्यस्त्राणि मारिष।
धनुर्वेदश्च कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन यस्मिन् नित्यं प्रतिष्ठित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे बुद्धि में शुक्राचार्य के समान तथा नीति में बृहस्पति के समान हैं। *मरिष! चारों वेद, ब्रह्मचर्य, संहार विधि सहित समस्त दिव्यास्त्र तथा सम्पूर्ण धनुर्वेद उनमें सदैव प्रतिष्ठित रहते हैं। 6-7।
 
He is equal to Shukracharya in wisdom and Brihaspati in policy. *Marish! All the four Vedas, celibacy, all the divine weapons including the method of destruction and the entire Dhanurveda are always established in him. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)