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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन
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श्लोक 54
श्लोक
4.58.54
तत्रार्जुनेन मुक्तानां पततां वै शरीरिषु।
पर्वतेष्विव वज्राणां शराणां श्रूयते स्वन:॥ ५४॥
अनुवाद
जब अर्जुन के छोड़े हुए बाण देहधारियों पर पड़े, तब पर्वतों पर गिरने वाले वज्र के समान भयंकर शब्द सुनाई दिया ॥54॥
When the arrows shot by Arjuna fell on the embodied beings, a terrible sound like that of thunderbolts falling on the mountains was heard. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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