श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  4.58.53 
एवं शूरौ महेष्वासौ विसृजन्तौ शिताञ्छरान्।
एकच्छायं चक्रतुस्तावाकाशं शरवृष्टिभि:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे दोनों महाधनुर्धर तीक्ष्ण बाण चलाते हुए अपनी बाणों की वर्षा से आकाश को घोर अंधकार में डुबाने लगे ॥53॥
 
Thus, those two great archers, shooting sharp arrows, began to immerse the sky in absolute darkness by their shower of arrows. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)