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mahabharat 4.58.47: तत्पश्चात् समस्त विजयी वीरों में श्रेष्ठ अर्जुन ने अपने तीखे बाणों से महागुरु द्रोणाचार्य के द्वारा तीक्ष्ण किये हुए बाणों को नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 4.58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  4.58.47 
अथ त्वाचार्यमुख्येन शरान् सृष्टाञ्छिलाशितान्।
न्यवारयच्छितैर्बाणैरर्जुनो जयतां वर:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त विजयी वीरों में श्रेष्ठ अर्जुन ने अपने तीखे बाणों से महागुरु द्रोणाचार्य के द्वारा तीक्ष्ण किये हुए बाणों को नष्ट कर दिया।
 
Thereafter, Arjuna, the best of all victorious heroes, destroyed with his sharp arrows the arrows sharpened to perfection by Drona, the great teacher.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)