vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन
»
श्लोक 42
श्लोक
4.58.42
एवं तौ स्वर्णविकृतान् विमुञ्चन्तौ महाशरान्।
आकाशं संवृतं वीरावुल्काभिरिव चक्रतु:॥ ४२॥
अनुवाद
इस प्रकार दोनों वीरों ने सुवर्ण से विभूषित अपने महाबली बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी और आकाश को उल्काओं से आच्छादित कर दिया ॥ 42॥
Thus, both the heroes began to shower their mighty arrows decorated with gold, and thus covered the sky with meteors. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×