श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.58.41 
द्रोणस्य पुङ्खसक्ताश्च प्रभवन्त: शरासनात्।
एको दीर्घ इवादृश्यदाकाशे संहत: शर:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वे सभी पंखयुक्त बाण समूह आचार्य द्रोण के धनुष से प्रकट हुए और आकाश में उन बाणों का समूह मिलकर एक विशाल बाण के समान दिखाई देने लगा॥ 41॥
 
All those groups of arrows with wings appeared from the bow of Acharya Drona. In the sky, the group of those arrows joined together looked like a single huge arrow.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)