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mahabharat 4.58.25: तत्पश्चात् वहाँ एकत्रित हुए समस्त सैनिक तीव्र गति से एक दूसरे पर बाण वर्षा करने वाले उन दोनों वीरों की ‘साधु-साधु’ कहकर स्तुति करने लगे॥25॥   |   mahabharat अध्याय 4.58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.58.25 
व्यस्मयन्त ततो योधा ये तत्रासन् समागता:।
शरान् विसृजतोस्तूर्णं साधु साध्वित्यपूजयन्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वहाँ एकत्रित हुए समस्त सैनिक तीव्र गति से एक दूसरे पर बाण वर्षा करने वाले उन दोनों वीरों की ‘साधु-साधु’ कहकर स्तुति करने लगे॥25॥
 
Thereafter, all the soldiers who had gathered there, started praising the two heroes, who were showering arrows on each other at a rapid speed, by saying 'Sadhu-Sadhu'. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)