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श्लोक 20
श्लोक
4.58.20
ततोऽस्मै प्राहिणोद् द्रोण: शरानधिकविंशतिम्।
अप्राप्तांश्चैव तान् पार्थश्चिच्छेद कृतहस्तवत्॥ २०॥
अनुवाद
तब द्रोण ने अर्जुन पर इक्कीस बाण छोड़े, किन्तु पार्थ ने उन सभी को अर्जुन तक पहुँचने से पहले ही काट डाला, मानो उनके हाथ इस कला में पारंगत थे।
Then Drona shot twenty-one arrows at Arjuna, but Partha cut them all down before they could reach him, as if his hands were well trained in this art.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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