Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.58.18-19: आचार्य! आपको युद्ध में पराजित करना अत्यन्त कठिन है। हमने अनेक वर्षों तक वन में रहकर कष्ट सहे हैं। अब हम शत्रुओं से बदला लेने की इच्छा से आये हैं; अतः आप हम पर क्रोध न करें। अनघ! मैं आप पर तभी आक्रमण करूँगा जब आप पहले मुझ पर आक्रमण करेंगे। यह मेरा निश्चय है, अतः आप पहले मुझ पर आक्रमण करें।॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 4.58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आचार्य! आपको युद्ध में पराजित करना अत्यन्त कठिन है। हमने अनेक वर्षों तक वन में रहकर कष्ट सहे हैं। अब हम शत्रुओं से बदला लेने की इच्छा से आये हैं; अतः आप हम पर क्रोध न करें। अनघ! मैं आप पर तभी आक्रमण करूँगा जब आप पहले मुझ पर आक्रमण करेंगे। यह मेरा निश्चय है, अतः आप पहले मुझ पर आक्रमण करें।॥18-19॥
‘Acharya! It is very difficult to defeat you in battle. We have lived in the forest for many years and suffered. Now we have come with the desire to take revenge from the enemies; therefore, please do not be angry with us. Anagha! I will attack you only when you attack me first. This is my determination, therefore, you attack me first.'॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥