Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.58.10: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! अर्जुन के ऐसा आदेश देने पर विराटनन्दन उत्तर ने सुवर्ण के आभूषणों से विभूषित उन घोड़ों को आचार्य द्रोण के रथ की ओर हाँक दिया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 4.58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.58.10 
वैशम्पायन उवाच
अर्जुनेनैवमुक्तस्तु वैराटिर्हेमभूषणान्।
चोदयामास तानश्वान् भारद्वाजरथं प्रति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! अर्जुन के ऐसा आदेश देने पर विराटनन्दन उत्तर ने सुवर्ण के आभूषणों से विभूषित उन घोड़ों को आचार्य द्रोण के रथ की ओर हाँक दिया॥10॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! On Arjuna giving such orders, Viratanandan Uttara drove those horses adorned with gold ornaments towards the chariot of Acharya Drona. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)