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mahabharat 4.57.9: जब युद्धभूमि में पराक्रमी एवं विजयी अर्जुन ने उस शंख को बजाया तो उससे इतनी तेज ध्वनि हुई मानो कोई पर्वत फट गया हो।   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.57.9 
तस्य शब्दो महानासीद् धम्यमानस्य जिष्णुना।
तथा वीर्यवता संख्ये पर्वतस्येव दीर्यत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब युद्धभूमि में पराक्रमी एवं विजयी अर्जुन ने उस शंख को बजाया तो उससे इतनी तेज ध्वनि हुई मानो कोई पर्वत फट गया हो।
 
When blown on the battlefield by the mighty and victorious Arjuna, that conch shell produced a sound so loud as if a mountain had burst.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)