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mahabharat 4.57.35: तत्पश्चात् अत्यन्त तेजस्वी कुन्तीपुत्र ने उस रणभूमि में कुपित होकर (कृपाचार्य पर) शिला पर रगड़कर तीक्ष्ण की गई अग्नि के समान तेजस्वी तेरह बाण चलाये॥35॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  4.57.35 
तत: पार्थो महातेजा विशिखानग्नितेजस:।
चिक्षेप समरे क्रुद्धस्त्रयोदश शिलाशितान्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अत्यन्त तेजस्वी कुन्तीपुत्र ने उस रणभूमि में कुपित होकर (कृपाचार्य पर) शिला पर रगड़कर तीक्ष्ण की गई अग्नि के समान तेजस्वी तेरह बाण चलाये॥35॥
 
Thereafter, the son of Kunti, who was very brilliant, being angry in that battlefield, shot thirteen arrows as bright as fire made sharp by rubbing on a stone (at Kripacharya). 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)