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श्लोक  4.57.29 
छिन्ने धनुषि पार्थेन सोऽन्यदादाय कार्मुकम्।
चकार गौतम: सज्यं तदद्‍भुतमिवाभवत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन ने अपना धनुष काट दिया, तो गौतम (कृप) ने दूसरा धनुष लिया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई। यह एक अद्भुत घटना थी।
 
When Arjuna cut off his bow, Gautama (Kripa) took another bow and strung it. This was a wonderful thing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)