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mahabharat 4.57.27: तब पार्थ ने तीखे बाणों से उसके कवच को छेद डाला, परन्तु उसके शरीर को कोई क्षति नहीं पहुँचाई ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.57.27 
अथास्य कवचं बाणैर्निशितैर्मर्मभेदिभि:।
व्यधमन्न च पार्थोऽस्य शरीरमवपीडयत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तब पार्थ ने तीखे बाणों से उसके कवच को छेद डाला, परन्तु उसके शरीर को कोई क्षति नहीं पहुँचाई ॥27॥
 
Partha then pierced his armour with sharp arrows, but did not cause any harm to his body. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)