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mahabharat 4.57.25: किन्तु पुनः अपना स्थान ग्रहण करते ही कृपाचार्य ने तुरन्त ही श्वेत गरुड़ के पंख लगे दस बाणों से अर्जुन को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.57.25 
स तु लब्ध्वा पुन: स्थानं गौतम: सव्यसाचिनम्।
विव्याध दशभिर्बाणैस्त्वरित: कङ्कपत्रिभि:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
किन्तु पुनः अपना स्थान ग्रहण करते ही कृपाचार्य ने तुरन्त ही श्वेत गरुड़ के पंख लगे दस बाणों से अर्जुन को घायल कर दिया।
 
But, on resuming his position, Krupacharya immediately pierced Arjuna with ten arrows fitted with white eagle's feathers. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)