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mahabharat 4.57.21: फिर उन्होंने बड़े जोर से गर्जना की और युद्ध में अप्रतिम पराक्रमी पृथ्वीपुत्र महात्मा को तत्काल ही दस हजार बाणों से घायल कर दिया ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.57.21 
तूर्णं दशसहस्रेण पार्थमप्रतिमौजसम्।
अर्दयित्वा महात्मानं ननर्द समरे कृप:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने बड़े जोर से गर्जना की और युद्ध में अप्रतिम पराक्रमी पृथ्वीपुत्र महात्मा को तत्काल ही दस हजार बाणों से घायल कर दिया ॥21॥
 
Then, He roared loudly and instantly struck the son of Prithvi, the great soul, who was of unmatched prowess, with ten thousand arrows in the battle. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)