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श्लोक 4.57.2  |
जाम्बूनदमयी वेदी ध्वजे यस्य प्रदृश्यते।
तस्य दक्षिणतो याहि कृप: शारद्वतो यत:॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| उत्तर! जिस रथ की ध्वजा पर स्वर्ण वेदी का चिह्न अंकित है, उसके दाहिनी ओर चलो। उस ओर शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य हैं।॥2॥ |
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| Answer! Walk to the right of the chariot whose flag shows the symbol of a golden altar. Sharadwan's son Kripacharya is on that side.'॥ 2॥ |
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