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mahabharat 4.57.16: तत्पश्चात् कृपाचार्य ने शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले कुन्तीनन्दन अर्जुन को हृदय में छेद करने वाले दस तीखे बाणों द्वारा तुरंत घायल कर दिया ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.57.16 
तत: शारद्वतस्तूर्णं पार्थं दशभिराशुगै:।
विव्याध परवीरघ्नं निशितैर्मर्मभेदिभि:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कृपाचार्य ने शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले कुन्तीनन्दन अर्जुन को हृदय में छेद करने वाले दस तीखे बाणों द्वारा तुरंत घायल कर दिया ॥16॥
 
Thereafter, Kripacharya immediately pierced Kuntinandan Arjun, the destroyer of enemy warriors, with ten sharp arrows that pierced the heart. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)