Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.57.12-13: महाबली कृपाचार्य बल और पराक्रम से संपन्न थे। उन्हें पराजित करना अत्यंत कठिन था। अर्जुन द्वारा शंख बजाने पर वे उन पर क्रोधित हो गए। शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य उस समय अर्जुन का शंख बजाना सहन नहीं कर सके। वे अर्जुन पर कुछ क्रोधित हुए; इसलिए युद्ध की इच्छा से उस महाबली योद्धा ने अपना शंख लिया और उसे बड़े जोर से बजाया। 12-13. | mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतस्मिन्नन्तरे वीरो बलवीर्यसमन्वित:।
अर्जुनं प्रति संरब्ध: कृप: परमदुर्जय:।
अमृष्यमाणस्तं शब्दं कृप: शारद्वतस्तदा॥ १२॥
अर्जुनं प्रति संरब्धो युद्धार्थी स महारथ:।
महोदधिजमादाय दध्मौ वेगेन वीर्यवान्॥ १३॥
अनुवाद
महाबली कृपाचार्य बल और पराक्रम से संपन्न थे। उन्हें पराजित करना अत्यंत कठिन था। अर्जुन द्वारा शंख बजाने पर वे उन पर क्रोधित हो गए। शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य उस समय अर्जुन का शंख बजाना सहन नहीं कर सके। वे अर्जुन पर कुछ क्रोधित हुए; इसलिए युद्ध की इच्छा से उस महाबली योद्धा ने अपना शंख लिया और उसे बड़े जोर से बजाया। 12-13.
The valiant warrior Kripacharya was endowed with strength and valour. It was very difficult to defeat him. He became angry with Arjuna after he blew his conch. Sharadwan's son Kripacharya could not tolerate Arjuna's blowing of the conch at that time. He was somewhat angry with Arjuna; therefore, desiring a battle, that mighty warrior took his conch and blew it with great force. 12-13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥