श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 55: अर्जुनद्वारा कौरवसेनाका संहार और उत्तरका उनके रथको कृपाचार्यके पास ले जाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  4.55.52 
नागकक्षा तु रुचिरा ध्वजाग्रे यस्य तिष्ठति।
एष वैकर्तन: कर्णो विदित: पूर्वमेव ते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जिसके ध्वज के अग्रभाग पर हाथी का चिह्न या उसकी शृंखला लहराती हुई हो, वह विकर्तनपुत्र कर्ण है। उसे तो आप जानते ही हैं ॥52॥
 
The one whose flag has a flag bearing the symbol of an elephant or its chain fluttering on its front is Karna, the son of Vikartana. You are already acquainted with him. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)