श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 55: अर्जुनद्वारा कौरवसेनाका संहार और उत्तरका उनके रथको कृपाचार्यके पास ले जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.55.32 
अर्जुनानिलभिन्नानि वनान्यर्जुनविद्विषाम्।
चक्रुर्लोहितधाराभिर्धरणीं लोहितान्तराम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो वन अर्जुन के शत्रुओं के समान था, वह अर्जुन की वायु से टुकड़े-टुकड़े हो गया और पृथ्वी रक्त की लाल धाराएँ बहाकर लाल होने लगी ॥32॥
 
The forest which was like the enemies of Arjuna was torn to pieces by the wind of Arjuna and the earth started turning red by flowing red streams of blood. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)