| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 54: अर्जुनका कर्णपर आक्रमण, विकर्णकी पराजय, शत्रुंतप और संग्रामजित् का वध, कर्ण और अर्जुनका युद्ध तथा कर्णका पलायन » श्लोक 27 |
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| | | | श्लोक 4.54.27  | उद्धूतलाङ्गूलमहापताक-
ध्वजोत्तमांसाकुलभीषणान्तम्।
गाण्डीवनिर्ह्रादकृतप्रणादं
किरीटिनं प्रेक्ष्य ननाद कर्ण:॥ २७॥ | | | | | | अनुवाद | | अर्जुन के रथ की ध्वजा पर बैठे हुए योद्धा वानर की पूँछ विशाल ध्वज के समान लहरा रही थी और उसके अग्रभाग से भूतों की भयंकर गर्जना आ रही थी। इसके साथ ही गाण्डीव धनुष की टंकार मेघों की गर्जना के समान फैल रही थी। ऐसा मुकुट पहने हुए अर्जुन को देखकर कर्ण बार-बार गर्जना करने लगा। | | | | The tail of the warrior monkey sitting on the flag of Arjuna's chariot was waving like a huge flag and the fearful roar of ghosts was coming from its front. Along with this, the twang of the Gandiva bow was spreading like the thunder of thunder. Looking at Arjuna wearing such a crown, Karna started roaring again and again. | | ✨ ai-generated | | |
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