श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 54: अर्जुनका कर्णपर आक्रमण, विकर्णकी पराजय, शत्रुंतप और संग्रामजित् का वध, कर्ण और अर्जुनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.54.26 
ततस्त्वभूद् वै तलतालशब्द:
सशङ्खभेरीपणवप्रणाद:।
प्रक्ष्वेडितज्यातलनि:स्वनं तं
वैकर्तनं पूजयतां कुरूणाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तब कर्ण धनुष पर बार-बार प्रत्यंचा खींचकर टंकार करने लगा और उसकी प्रशंसा करने वाले कौरव ताली बजाने और गर्जना करने लगे। शंख बजने लगे, नगाड़े बजने लगे और ढोलों की गम्भीर ध्वनि सर्वत्र गूँजने लगी॥26॥
 
Then Karna began to twange the bow by pulling the string again and again, and the Kauravas, who were praising him, began to clap and thunder. Conches were blown, drums were beaten and the deep sound of the dhols began to reverberate everywhere.॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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