श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 54: अर्जुनका कर्णपर आक्रमण, विकर्णकी पराजय, शत्रुंतप और संग्रामजित् का वध, कर्ण और अर्जुनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.54.23 
स पाण्डवस्तूर्णमुदीर्णकोप:
कृतागसं कर्णमुदीक्ष्य हर्षात्।
क्षणेन साश्वं सरथं ससारथि-
मन्तर्दधे घोरशरौघवृष्टॺा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अपने अपराधी कर्ण को अपने सामने देखकर पाण्डवपुत्र अर्जुन की क्रोधाग्नि भड़क उठी। वह तुरन्त ही हर्ष और उत्साह से भर गया और भयंकर बाणों की वर्षा करता हुआ उसने क्षण भर में ही कर्ण को उसके घोड़े, रथ और सारथि सहित ढक लिया॥ 23॥
 
Seeing his culprit Karna in front of him, the fire of anger of Pandava's son Arjun flared up. He immediately got filled with joy and enthusiasm and showering fierce arrows, he covered Karna along with his horse, chariot and charioteer in a moment.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd