श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 54: अर्जुनका कर्णपर आक्रमण, विकर्णकी पराजय, शत्रुंतप और संग्रामजित् का वध, कर्ण और अर्जुनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.54.20 
स पाण्डवं द्वादशभि: पृषत्कै-
र्वैकर्तन: शीघ्रमथो जघान।
विव्याध गात्रेषु हयांश्च सर्वान्
विराटपुत्रं च करे निजघ्ने॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सूर्यपुत्र कर्ण ने बड़े वेग से पांडवपुत्र अर्जुन को बारह बाणों से घायल कर दिया। उसके घोड़ों के शरीर टुकड़े-टुकड़े कर दिए और विराटपुत्र उत्तर के हाथ पर भी भारी चोट पहुँचाई।
 
With great speed, Karna, the son of Surya, pierced Arjuna, the son of Pandava, with twelve arrows. He pierced the bodies of his horses into pieces and also inflicted a heavy injury on the hand of Uttar, the son of Virat.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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