श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 54: अर्जुनका कर्णपर आक्रमण, विकर्णकी पराजय, शत्रुंतप और संग्रामजित् का वध, कर्ण और अर्जुनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.54.12 
स तेन राज्ञातिरथेन विद्धो
विगाहमानो ध्वजिनीं कुरूणाम्।
शत्रुंतपं पञ्चभिराशु विद्धा
ततोऽस्य सूतं दशभिर्जघान॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कौरव सेना में विचरण करते हुए अर्जुन ने महारथी राजा शत्रुताप के बाणों से घायल होकर तुरन्त ही पाँच बाणों से उसे घायल कर दिया। फिर उसने अपने सारथि को दस बाणों से घायल करके उसे यमलोक भेज दिया॥12॥
 
Arjuna, who was moving in the Kaurava army, was wounded by the arrows of the great charioteer King Shatrutap and immediately pierced him with five arrows. Then he shot his charioteer with ten arrows and sent him to Yamaloka.॥12॥
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