श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 54: अर्जुनका कर्णपर आक्रमण, विकर्णकी पराजय, शत्रुंतप और संग्रामजित् का वध, कर्ण और अर्जुनका युद्ध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.54.10 
ततो विकर्णस्य धनुर्विकृष्य
जाम्बूनदाग्रॺोपचितं दृढज्यम्।
अपातयत् तं ध्वजमस्य मथ्य
च्छिन्नध्वज: सोऽप्यपयाज्जवेन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने अपने बाणों से विकर्ण का धनुष काट डाला, जो बलवान, सुवर्णजटित था और जिससे उसकी ध्वजा भी टुकड़े-टुकड़े होकर गिर पड़ी। रथ की ध्वजा कट जाने पर विकर्ण बड़े वेग से भाग गया।
 
Then Arjuna with his arrows cut off Vikarna's bow, which had a strong bow and was studded with gold and which also broke his flag into pieces and dropped it. After the chariot's flag was cut, Vikarna fled away with great speed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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