श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 53: अर्जुनका दुर्योधनकी सेनापर आक्रमण करके गौओंको लौटा लेना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.53.17 
नैषोऽन्तरेण राजानं बीभत्सु: स्थातुमिच्छति।
तस्य पार्ष्णिं ग्रहीष्यामो जवेनाभिप्रयास्यत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यह अर्जुन राजा दुर्योधन के बिना रहना नहीं चाहता, इसलिए वह उसी ओर बहुत तेजी से जा रहा है। इसलिए आओ, हम शीघ्रता से चलकर उसका पीछा करें॥17॥
 
This Arjun does not want to stay without King Duryodhan, so he is going in that direction very fast. So let us go quickly and chase him.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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