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mahabharat 4.52.8-9: कुरुवंश को आनंदित करने वाले पांडव उस समय वीरतापूर्ण कार्य करने में समर्थ थे, किन्तु वे धर्म के बंधनों से बंधे हुए थे; इसलिए उन्होंने अपने क्षत्रिय व्रत को नहीं तोड़ा। यदि कोई अर्जुन को झूठा कहेगा, तो उसकी पराजय होगी। कुंतीपुत्र मृत्यु को गले लगा सकते हैं, किन्तु किसी भी प्रकार से असत्य का सहारा नहीं ले सकते। 8-9.   |   mahabharat अध्याय 4.52: पितामह भीष्मकी सम्मति   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 52: पितामह भीष्मकी सम्मति  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  4.52.8-9 
तदैव ते हि विक्रान्तुमीषु: कौरवनन्दना:।
धर्मपाशनिबद्धास्तु न चेलु: क्षत्रियव्रतात्॥ ८॥
यच्चानृत इति ख्यायाद् य: स गच्छेत् पराभवम्।
वृणुयुर्मरणं पार्था नानृतत्वं कथंचन॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कुरुवंश को आनंदित करने वाले पांडव उस समय वीरतापूर्ण कार्य करने में समर्थ थे, किन्तु वे धर्म के बंधनों से बंधे हुए थे; इसलिए उन्होंने अपने क्षत्रिय व्रत को नहीं तोड़ा। यदि कोई अर्जुन को झूठा कहेगा, तो उसकी पराजय होगी। कुंतीपुत्र मृत्यु को गले लगा सकते हैं, किन्तु किसी भी प्रकार से असत्य का सहारा नहीं ले सकते। 8-9.
 
The Pandavas, who brought joy to the Kuru clan, were capable of performing heroic deeds at that time, but they were bound by the shackles of Dharma; therefore they did not deviate from their Kshatriya vow. If anyone calls Arjun a liar, he will be defeated. The sons of Kunti can embrace death, but cannot resort to falsehood in any way. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)