श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 52: पितामह भीष्मकी सम्मति  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  4.52.20-21 
वैशम्पायन उवाच
तद् वाक्यं रुरुचे तेषां भीष्मेणोक्तं महात्मना।
तथा हि कृतवान् राजा कौरवाणामनन्तरम्॥ २०॥
भीष्म: प्रस्थाप्य राजानं गोधनं तदनन्तरम्।
सेनामुख्यान् व्यवस्थाप्य व्यूहितुं सम्प्रचक्रमे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! महात्मा भीष्म के कहे हुए वचन सभी को प्रिय लगे। फिर कौरवों के राजा दुर्योधन ने भी वैसा ही किया। पहले राजा दुर्योधन को भेजकर और फिर गोधन को भेजकर भीष्मजी ने सेनापतियों को व्यवस्थित करके सेना की व्यूह रचना करने की तैयारी की। 20-21।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Everyone liked the words spoken by Mahatma Bhishma. Then the king of the Kauravas Duryodhan did the same. First sending King Duryodhan and then sending the cattle, Bhishmaji arranged the commanders and prepared to form the army formation. 20-21.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)