श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 52: पितामह भीष्मकी सम्मति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.52.13 
सम्प्रवृत्ते तु संग्रामे भावाभावौ जयाजयौ।
अवश्यमेकं स्पृशतो दृष्टमेतदसंशयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह सदैव देखा गया है कि जब युद्ध छिड़ता है, तो एक पक्ष को लाभ या हानि अवश्य होती है, जीत या हार अवश्य होती है। इसमें कोई संदेह नहीं है ॥13॥
 
It has always been observed that when a war breaks out, one side or the other surely gains or loses, wins or loses. There is no doubt about this. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)