श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 52: पितामह भीष्मकी सम्मति  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  4.52.1-2 
भीष्म उवाच
कला: काष्ठाश्च युज्यन्ते मुहूर्ताश्च दिनानि च।
अर्धमासाश्च मासाश्च नक्षत्राणि ग्रहास्तथा॥ १॥
ऋतवश्चापि युज्यन्ते तथा संवत्सरा अपि।
एवं कालविभागेन कालचक्रं प्रवर्तते॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "काल, काष्ठा, मुहूर्त, दिन, मास, पक्ष, नक्षत्र, ग्रह, ऋतु और संवत्सर - ये सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इस प्रकार समय के इन छोटे-छोटे विभागों से यह सम्पूर्ण कालचक्र चल रहा है॥1-2॥
 
Bhishma said, "Kala, Kashtha, Muhurta, day, month, fortnight, constellation, planet, season and Samvatsar - all these are connected to each other. In this way, this entire time cycle is running through these small divisions of time.॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)