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यथा नायं समायुञ्ज्याद् धार्तराष्ट्रान् कथंचन।
न च सेना: पराजय्यात् तथा नीतिर्विधीयताम्॥ २१॥
अनुवाद
ऐसी स्थिति में जो भी संभव हो, ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे वे धृतराष्ट्र के पुत्रों पर आक्रमण न कर सकें और कौरव सेनाओं को किसी भी प्रकार पराजित न कर सकें ॥ 21॥
In such a situation, whatever is possible, a policy should be made so that they are not able to attack the sons of Dhritarashtra and are not able to defeat the Kaurava armies in any way. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥