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mahabharat 4.51.21: ऐसी स्थिति में जो भी संभव हो, ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे वे धृतराष्ट्र के पुत्रों पर आक्रमण न कर सकें और कौरव सेनाओं को किसी भी प्रकार पराजित न कर सकें ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 4.51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.51.21 
यथा नायं समायुञ्‍ज्‍याद् धार्तराष्ट्रान् कथंचन।
न च सेना: पराजय्यात् तथा नीतिर्विधीयताम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में जो भी संभव हो, ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे वे धृतराष्ट्र के पुत्रों पर आक्रमण न कर सकें और कौरव सेनाओं को किसी भी प्रकार पराजित न कर सकें ॥ 21॥
 
In such a situation, whatever is possible, a policy should be made so that they are not able to attack the sons of Dhritarashtra and are not able to defeat the Kaurava armies in any way. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)