Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.51.2: विद्वान पुरुष को अपने गुरु की निन्दा या अनादर नहीं करना चाहिए। मेरा भी यही मानना है कि देश और काल का विचार करके ही युद्ध करना उचित है।॥2॥ | mahabharat अध्याय 4.51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विद्वान पुरुष को अपने गुरु की निन्दा या अनादर नहीं करना चाहिए। मेरा भी यही मानना है कि देश और काल का विचार करके ही युद्ध करना उचित है।॥2॥
A learned man should not criticize or disrespect his teacher. I also believe that it is appropriate to fight a war only after considering the country and time.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥