Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.51.15: शत्रु के भी गुणों को स्वीकार करना चाहिए और गुरु के दोषों को बताने में संकोच नहीं करना चाहिए। गुरु को सब प्रकार से पूर्ण प्रयास करते हुए केवल वही कहना चाहिए जो पुत्र और शिष्य के लिए हितकर हो।॥15॥ | mahabharat अध्याय 4.51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रु के भी गुणों को स्वीकार करना चाहिए और गुरु के दोषों को बताने में संकोच नहीं करना चाहिए। गुरु को सब प्रकार से पूर्ण प्रयास करते हुए केवल वही कहना चाहिए जो पुत्र और शिष्य के लिए हितकर हो।॥15॥
One should accept the good qualities of even the enemy and should not hesitate to point out the faults of the Guru. The Guru should make full efforts in every way and say only that which is beneficial for the son and the disciple.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥