Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.50.26: यमराज, वायु, मृत्यु और महाअग्नि - ये सब उसे पूर्णतः नष्ट न करके कुछ न कुछ छोड़ भी सकते हैं, किन्तु जब अर्जुन क्रोधित हो जाता है, तब वे कुछ भी नहीं छोड़ते ॥26॥ | mahabharat अध्याय 4.50: अश्वत्थामाके उद्गार । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्तक: पवनो मृत्युस्तथाग्निर्वडवामुख:।
कुर्युरेते क्वचिच्छेषं न तु क्रुद्धो धनंजय:॥ २६॥
अनुवाद
यमराज, वायु, मृत्यु और महाअग्नि - ये सब उसे पूर्णतः नष्ट न करके कुछ न कुछ छोड़ भी सकते हैं, किन्तु जब अर्जुन क्रोधित हो जाता है, तब वे कुछ भी नहीं छोड़ते ॥26॥
Yamaraja, the wind, death and the great fire - they may not destroy him completely and may leave something behind, but when Arjuna gets angry they will leave nothing. ॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥