श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 50: अश्वत्थामाके उद्‍गार  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.50.24 
नाक्षान् क्षिपति गाण्डीवं न कृतं द्वापरं न च।
ज्वलतो निशितान् बाणांस्तांस्तान् क्षिपति गाण्डिवम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
गाण्डीव धनुष कृत, द्वापर और त्रेता नामक पासे नहीं फेंकता, अपितु वह निरन्तर तीक्ष्ण और प्रज्वलित बाणों की वर्षा करता रहता है।
 
The Gāndīva bow does not throw dice called Krita, Dvāpara and Treta; it instead continuously showers sharp and blazing arrows. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)