श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 50: अश्वत्थामाके उद्‍गार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.50.17 
नैष देवान् न गन्धर्वान् नासुरान्न च राक्षसान्।
भयादिह न युध्येत कुन्तीपुत्रो धनंजय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन अर्जुन के लिए यह कदापि सम्भव नहीं है कि वे भय के कारण देवता, गन्धर्व, दानव और राक्षसों से भी युद्ध न करें॥17॥
 
It is never possible for Kuntinandan Arjun not to fight even with gods, Gandharvas, demons and demons due to fear. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)