Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.5.6: महाराज! देखिए, यहाँ अनेक प्रकार के खेत और उन तक पहुँचने वाले अनेक मार्ग दिखाई दे रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि विराट की राजधानी बहुत दूर होगी। मैं बहुत थक गया हूँ, इसलिए आइए हम एक रात और यहीं रुकें।॥6॥ | mahabharat अध्याय 4.5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पश्यैकपद्यो दृश्यन्ते क्षेत्राणि विविधानि च।
व्यक्तं दूरे विराटस्य राजधानी भविष्यति।
वसामेहापरां रात्रिं बलवान् मे परिश्रम:॥ ६॥
अनुवाद
महाराज! देखिए, यहाँ अनेक प्रकार के खेत और उन तक पहुँचने वाले अनेक मार्ग दिखाई दे रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि विराट की राजधानी बहुत दूर होगी। मैं बहुत थक गया हूँ, इसलिए आइए हम एक रात और यहीं रुकें।॥6॥
‘Maharaj! Look, here we can see many types of fields and many paths leading to them. It seems that Virat's capital must be far away. I am feeling very tired, so let us stay here for one more night.'॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥