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mahabharat 4.5.29: तब नकुल उस वृक्ष पर चढ़ गए और अपने हाथों से धनुष और अन्य अस्त्र-शस्त्र उसके छिद्रों में रख दिए। छिद्रों के छिद्र नकुल को दिव्य प्रतीत हुए।   |   mahabharat अध्याय 4.5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.5.29 
तामुपारुह्य नकुलो धनूंषि निदधे स्वयम्।
यानि तस्यावकाशानि दिव्यरूपाण्यमन्यत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तब नकुल उस वृक्ष पर चढ़ गए और अपने हाथों से धनुष और अन्य अस्त्र-शस्त्र उसके छिद्रों में रख दिए। छिद्रों के छिद्र नकुल को दिव्य प्रतीत हुए।
 
Then Nakula climbed that tree and placed the bow and other weapons in its holes with his own hands. The holes in the holes appeared divine to Nakula.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)