Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.5.21-23: भीमसेन ने भी उसी धनुष की डोरी खींच ली, जिसके द्वारा उन्होंने पांचाल योद्धाओं को जीत लिया था, जिसकी सहायता से उन्होंने दिग्विजय के समय अकेले ही अनेक शत्रुओं को परास्त किया था, जिसकी भयानक गर्जना वज्र के टूटने और पर्वत के फटने के समान थी, जिसके कारण अनेक शत्रु युद्ध छोड़कर भाग गए थे और जिसकी सहायता से उन्होंने सिंधुराज जयद्रथ को पराजित किया था। | mahabharat अध्याय 4.5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीमसेन ने भी उसी धनुष की डोरी खींच ली, जिसके द्वारा उन्होंने पांचाल योद्धाओं को जीत लिया था, जिसकी सहायता से उन्होंने दिग्विजय के समय अकेले ही अनेक शत्रुओं को परास्त किया था, जिसकी भयानक गर्जना वज्र के टूटने और पर्वत के फटने के समान थी, जिसके कारण अनेक शत्रु युद्ध छोड़कर भाग गए थे और जिसकी सहायता से उन्होंने सिंधुराज जयद्रथ को पराजित किया था।
Bhimasena also pulled off the string of the same bow with which he had conquered the Panchala warriors, with whose help he had single-handedly defeated many enemies during the Digvijaya, whose terrifying roar was like the cracking of a thunderbolt and the splitting of a mountain, due to which many enemies fled from the battle and with whose help he had defeated Sindhuraj Jayadratha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥